फ्रांस की राजधानी पेरिस समेत कई बड़े शहर आज तड़के एक बार फिर युद्ध का मैदान बन गए। देश में बढ़ती महंगाई, पुलिस कार्रवाई और सरकारी नीतियों के खिलाफ लाखों लोगों ने सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन तब हिंसक हो उठा जब पेरिस के केंद्र में नकाबपोश युवाओं के समूह ने दर्जनों गाड़ियों, सरकारी इमारतों और दुकानों में आग लगा दी।
फ्रांसीसी पुलिस ने उग्र भीड़ को तीतर-बीतर करने के लिए आंसू गैस, वॉटर कैनन और रबड़ की गोलियों का अंधाधुंध इस्तेमाल किया, जिससे दर्जनों प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने आपातकालीन सुरक्षा समीक्षा बैठक के बाद शांति की अपील की, लेकिन प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि वे सरकार को घुटनों पर लाए बिना पीछे नहीं हटेंगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान जारी कर फ्रांस की स्थिति पर तंज कसा और पूरे संकट के लिए प्रवासन नीतियों को जिम्मेदार ठहरा दिया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक विवाद छिड़ गया है।
पेरिस की सड़कों पर धधकती आग और गोलियों की आवाजें यह बताने के लिए काफी हैं कि यूरोप का दिल कहे जाने वाले देश में लोकतंत्र और जनता का विश्वास पूरी तरह तार-तार हो चुका है।
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