मिस्र के दमियाता पोर्ट पर ईरानी ड्रोन्स का तांडव, दहला भूमध्य सागर! अमेरिकी गैस टैंकरों को फूंकने के बाद क्या लाल सागर पर कब्जा करेगा भारत?

मध्य पूर्व की जंग अब नई और विनाशकारी भौगोलिक सीमाओं को पार कर चुकी है। पिछले 24 घंटों में इस युद्ध का सबसे खौफनाक विस्तार तब देखने को मिला जब मिस्र के रणनीतिक दमियाता पोर्ट पर अचानक भयानक ड्रोन हमले हुए। इस हमले में भूमध्य सागर में खड़े दो विशालकाय गैस टैंकरों में भीषण आग लग गई, जिनमें से एक अमेरिकी स्वामित्व वाला गैस स्टोरेज टैंकर था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट और मिस्र सरकार की शुरुआती जांच में सीधे तौर पर ईरान और उसके समर्थित मिलिशिया पर उंगली उठाई गई है। इस हमले ने साबित कर दिया है कि ईरान अब स्वेज नहर और भूमध्य सागर के पूरे व्यापारिक रूट को ठप करने की सनक पर उतर आया है।
इस ताजा घटनाक्रम से वैश्विक मैरीटाइम ट्रेड (समुद्री व्यापार) में हाहाकार मच गया है। अमेरिका और इजराइल के सैन्य कमांडरों ने चेतावनी दी है कि ईरान का अगला निशाना लाल सागर से गुजरने वाले तमाम कमर्शियल जहाज हो सकते हैं। लेकिन इस पूरे वैश्विक संकट के बीच केवल एक ही देश है जो समंदर का नया सिकंदर बनकर उभरा है, और वह है भारत। भारतीय नौसेना ने स्वेज नहर के मुहाने और अदन की खाड़ी में अपनी गश्त इस कदर बढ़ा दी है कि दुनिया भर के मर्चेंट शिप भारतीय तिरंगे की छत्रछाया में आगे बढ़ रहे हैं।
भविष्य की संभावनाएं और भारत का फायदा:
मिस्र और भूमध्य सागर में बढ़े इस खतरे के कारण पश्चिमी देश अब पूरी तरह से भारत के ‘इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर’ (IMEC) को जल्द से जल्द हकीकत में बदलने के लिए मजबूर होंगे। समंदर के असुरक्षित होने से खाड़ी देशों के जरिए भारत की भूमि और रेल मार्ग वाली कनेक्टिविटी को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलेगी। इसके अलावा, वैश्विक मर्चेंट नेवी में भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां भारत को भारी प्रीमियम देने को तैयार हैं। भारत के पक्ष में यह सबसे बड़ा भू-राजनीतिक मोड़ है, जहां दुनिया के समुद्री रास्तों की चाबी अब नई दिल्ली के हाथों में आ रही है।


