आरबीआई ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव, अर्थव्यवस्था पर रखी सतर्क नजर

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जून 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और रुपये पर दबाव देखा जा रहा है।
आरबीआई का मानना है कि फिलहाल आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया कि वह आने वाले महीनों में महंगाई, मानसून और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर नजर रखेगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला निवेशकों को स्थिरता का संदेश देता है।
हाल के महीनों में वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आरबीआई ने तत्काल किसी बड़े कदम से बचते हुए स्थिति का आकलन करने का निर्णय लिया है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि महंगाई बढ़ती है या मानसून कमजोर रहता है तो भविष्य में ब्याज दरों में बदलाव संभव है। फिलहाल आरबीआई की प्राथमिकता आर्थिक स्थिरता और निवेशकों का भरोसा बनाए रखना है।


